टैरिफ के मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बीच PM मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ क्यों की?
डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया में एक नए तरह का टैरिफ वॉर छेड़ा हुआ है. मेक्सिको, कनाडा और चीन इसका शिकार बन रहे हैं और भारत पर ये गाज 2 अप्रैल को गिर सकती है. डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से भारत पर ‘जैसे को तैसा’ टैरिफ लगाने का ऐलान किया हुआ है. इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए देखा गया है. आखिर क्या है उनका प्लान?
ट्रंप की टैरिफ नीति से बचने और उससे निपटने के लिए जहां चीन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. उसने एक्सपोर्ट को गिरने से बचाने के लिए ज्यादा पेंशन और बेहतर मेडिकल सुविधाएं देने का ऐलान किया है. वहीं भारत की अप्रोच इसे लेकर ‘देखो और इंतजार करो’ वाली है.
पीएम मोदी ने की ट्रंप की तारीफ
इधर भारत पर ट्र्रंप टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं. इसकी डेडलाइन भी करीब आ रही है. उस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने खुले दिल से डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की है. हाल में लेक्स फ्रिडमैन के पॉडकास्ट में पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के लिए बहुत अच्छे से तैयारी करके आए हैं. उनके पास अपने गोल अचीव करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप है. उन्हें पता है कि इसके लिए कौन-से रणनीतिक कदम उठाने हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर भारत को दुनिया के सबसे ज्यादा टैरिफ वसूलने वाले देशों में से एक बता चुके हैं. हालांकि इसके बावजूद उन्हें अक्सर पीएम मोदी की तारीफ करते हुए देखा गया है. असल में डोनाल्ड ट्रंप इतना चाहते हैं कि भारत कुछ ऐसे कदम उठाए जिससे व्यापार में अमेरिका को फायदा हो. वहीं भारत अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदना शुरू करे. दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर भी बातचीत जारी है.
क्या है पीएम मोदी का प्लान?
इस बीच भारत का प्लान क्लियर है. भारत चाहता है कि एलन मस्क यहां अपनी टेस्ला की फैक्टरी लगाएं, निवेश लाएं जिससे रोजगार पैदा हो. इसके लिए भारत ने कम टैरिफ वाली नई ईवी पॉलिसी तक तैयार कर ली है. हालांकि भारत से ज्यादा एलन मस्क को भी यहां के बाजार की जरूरत है, क्योंकि चीन और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में उसकी सेल लगातार गिर रही है.
वहीं भारत के टेलीकॉम सेक्टर में भी एलन मस्क की स्टारलिंक ने रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ सैटेलाइट इंटरनेट की डील साइन की है. तो इस तरह देखा जाए तो इस पूरी कवायद का फलसफा सिर्फ और सिर्फ बिजनेस है.
500 बिलियन डॉलर का ट्रेड
भारत और अमेरिका की लीडरशिप ने ‘इंडिया फर्स्ट’ और ‘अमेरिका फर्स्ट’ जैसे विजन को सामने रखा है. इसी को ध्यान में रखकर दोनों देश आपस में ट्रेड डील करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. वहीं टैरिफ वॉर को लेकर भारत जहां काफी सोच-समझकर कदम बढ़ा रहा है, वहीं चीन ने आर्थिक उथल-पुथल से बचने के लिए सक्रियता से काम करना शुरू कर दिया है.
फरवरी में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने चरणबद्ध तरीके से ट्रेड डील करने पर सहमति बनाई है. दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक आपसी ट्रेड को 500 बिलियन डॉलर पर ले जाने का है. वहीं इंडिया की एक योजना अपने एक्सपोर्ट को डायवर्सिफाई बनाने की भी है.
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक टैरिफ के बाद भारत के एक्सपोर्ट में 3 से 3.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. इसलिए भारत अल्टरनेटिव मार्केट में भी एक्सपोर्ट करने पर जोर दे रहा है. भारत ने संयुक्त अरब अमीरात से लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ टोटल 13 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन किए हैं. साथ ही ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय यूनियन के साथ बातचीत चल रही है. वहीं भारत अपने क्रूड इंपोर्ट को भी डायवर्सिफाई करना चाहता है. इसलिए वह इसे अलग-अलग देशों से सोर्स कर रहा है

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