इंदौर में गेर का इतिहास 200 साल पुराना
इंदौर: होली के बाद इंदौर में रंगपंचमी पर निकलने वाले गेर की बात ही अलग है. इस दिन का लोग सालभर इंतजार करते हैं. गेर को लेकर पुलिस ने ठोस व्यवस्था बनाई है. हुड़दंग करने वालों के साथ पुलिस सख्ती से पेश आएगी. पुलिस ने गेर में शामिल होने वालों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
इंदौर में गेर का इतिहास 200 साल पुराना
इंदौर में रंगपंचमी पर गेर जुलूस का इतिहास 200 साल पुराना है. गेर की शुरुआत होलकर राजवंश द्वारा की गई थी. होलकर राजवंश जब होली के बाद रंगपंचमी पर गेर खेलने के लिए इंदौर शहर में निकलते थे तो उनके पीछे जुलूस निकलता था. इसके साथ ही इंदौर में गेर की परंपरा चालू हुई, जो आज भी जारी है. इंदौर में रंगपंचमी पर 10 से अधिक गेर जुलूस निकलकर राजबाड़ा पहुंचते हैं. ऐसे में राजबाड़ा में लाखों की संख्या में लोग जमा होते हैं. लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को काबू करने और इनकी सुरक्षा के लिए पुलिस को विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं.
गेर रूट को 8 सेक्टर में बांटा
इंदौर एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह का कहना है "गेर रूट को 8 सेक्टर में बांटा गया है. व्यवस्था ऐसी की गई है कि गेर में आने वाले व्यक्ति को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो. हर सेक्टर पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की व्यवस्था मौजूद रहेगी. बेहतर पुलिसिंग के लिए वहां पर एलिवेटेड मंच बनाया गया है, जहां से पुलिस हुड़दंग करने वालों पर निगरानी रख सकेगी. सादा वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से पुलिस गेर के मार्ग पर निगरानी रखेगी."
मोबाइल गुम हो जाए तो क्या करें
गैर में गुम होने वाले मोबाइल फोन को लेकर भी पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है. क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया का कहना है "गुम हुए या चोरी हुए मोबाइल का प्रयोग सायबर ठगों द्वारा आसानी से किया जा सकता है. इसलिए गेर के दौरान यदि किसी का मोबाइल चोरी या गुम होता है तो सबसे पहले ऑनलाइन शिकायत पुलिस से करें."

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