Axiom-4 मिशन पर लखनऊ के शुभांशु शुक्ला की सफलतापूर्वक उड़ान
लखनऊ : राजधानी लखनऊ के शुभांशु शुक्ला के साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री को लेकर निकला SpaceX का फाल्कन 9 रॉकेट. लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद ड्रैगन अंतरिक्ष यान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर डॉक करेगा। भारत के लाल भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुंभाशु शुक्ला के अंतरिक्ष में झंडे गाड़ने की उड़ान पर उनकी माता आशा शुक्ला तो काफी भावुक हो गईं, जबकि पिता शंभु दयाल शुक्ला ने सिटी मांटेसरी स्कूल प्रबंधन के साथ उड़ान को देखा।
Shubhanshu Shukla's Space Axiom-4 Mission भारत के शुभांशु शुक्ला के साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री को लेकर निकला SpaceX का फाल्कन 9 रॉकेट. लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद ड्रैगन अंतरिक्ष यान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर डॉक करेगा। लखनऊ में सिटी मांटेसरी स्कूल ने कानपुर रोड शाखा में पूर्व छात्र शुभांशु शुक्ला की उड़ान को छात्र-छात्राओं को दिखाने का विशेष प्रबंध किया था, उसी में छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओें के साथ शुभांशु के माता-पिता को आमंत्रित किया गया और उड़ान दिखाई गई।
बेटे को अंतरिक्ष की उड़ान भरता देख शुभांशु शुक्ला के पिता शंभु दयाल शुक्ला और माता आशा शुक्ला की आंखे भर गई। यह खुशी और गर्व के आंसू थे और अपनी भावना व्यक्त करने के लिए उनके पास शब्द तक नहीं थे। सीएमएस कानपुर रोड के प्रेक्षागृह से शुभांशु शुक्ला एक्सियम मिशन-4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के रवाना होने का लाइव प्रसारण किया गया।
स्कूल में बच्चों ने इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने के लिए बड़ी तैयारी की थी। दोपहर 12 बजने तक पूरा प्रेक्षागृह हर तरफ उत्साह और जुनून से लबरेज हो गया। ठीक 12:10 बजे शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष की उड़ान भरते ही प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शुभांशु के माता-पिता की आंख से खुशी और गर्व के आंसू छलक पड़े। शुभांशु शुक्ला की मां आशा शुक्ला काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छा अनुभव है, हम सब बहुत भावुक हो गए थे। बहुत खुशी है।
इस पल के साक्षी शुभांशु के ससुर ब्रजमोहन मिश्रा और सास शशिकांता के अलावा उनकी बहनें, चचेरे भाई और अन्य कई रिश्तेदार भी बने। शुभांशु शुक्ला की पत्नी डा. कामना ने इस पल को अमेरिका से देखा। ब्रजमोहन मिश्रा ने बताया कि बेटी कामना अमेरिका में दंत रोग विशेषज्ञ है। शुभांशु वर्ष 2009 में वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे , जब कामना से उनका विवाह हुआ था। तब साेचा भी नहीं था कि शुभांशु इतिहास रच देंगे। आज अंतरिक्ष पहुंचने का सपना आखिर पूरा हो गया। इस मौके पर उनके परिवार और शहरवासियों में गर्व और भावुकता की लहर है, शुभांशु की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार का सिर ऊंचा किया है, बल्कि देशवासियों का भी सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

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