लखनऊ: मध्यांचल के 19 जिलों में अब पोस्टपेड हुए स्मार्ट मीटर, 10 जून तक आएगा बिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले 19 जिलों के करीब 18.67 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को वापस पोस्टपेड मोड पर शिफ्ट कर दिया है। विभाग ने इस बदलाव की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब उपभोक्ताओं को उनके मोबाइल पर बिल के संदेश भी प्राप्त होने लगे हैं।

इन जिलों के उपभोक्ताओं पर होगा असर

मध्यांचल निगम के अंतर्गत आने वाले लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, बाराबंकी, अयोध्या, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत के स्मार्ट मीटर उपभोक्ता अब पोस्टपेड व्यवस्था के दायरे में आ गए हैं। निगम के निदेशक (वाणिज्य) रजत जुनेजा ने बताया कि भेजे जा रहे संदेशों में उपभोक्ता की बैलेंस राशि का भी विवरण दिया जा रहा है।

हर महीने की 10 तारीख तक मिल जाएगा बिल

पॉवर कॉर्पोरेशन के नए निर्देशों के अनुसार, मई महीने की बिजली खपत का बिल उपभोक्ताओं को 10 जून तक उनके मोबाइल और व्हाट्सएप पर भेज दिया जाएगा। उपभोक्ता 'स्मार्ट ऐप' के माध्यम से अपना विस्तृत बिल डाउनलोड कर सकेंगे। भविष्य में भी हर माह की 10 तारीख तक बिल सीधे उपभोक्ता के मोबाइल पर भेजने की व्यवस्था की गई है।

स्मार्ट मीटरों की जांच पर उठा विवाद

एक तरफ जहाँ मीटरों का मोड बदला जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता जांचने वाली समिति पर सवाल खड़े किए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि मध्यांचल निगम की जिस लैब में 24 स्मार्ट मीटरों की जांच की गई, वह केवल साधारण मीटरों (IS 14697 व 13779) की जांच के लिए ही मान्यता प्राप्त है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के लिए IS 16444 मानक अनिवार्य है, जिसकी 'क्रिटिकल' जांच करने के लिए मध्यांचल की प्रयोगशाला अधिकृत नहीं है। परिषद ने आरोप लगाया है कि बिना मानक वाली लैब से रिपोर्ट तैयार करना नियमों के विरुद्ध है, क्योंकि स्मार्ट मीटरों की संचार क्षमता और तकनीकी बारीकियों की जांच विशेष लैब में ही संभव है।