दूषित पेयजल बना मौत का कारण, इंदौर में 15 लोगों की जान गई
इंदौर। इंदौर में दूषित पानी की वजह से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. अब मृतकों की संख्या 15 पहुंच गई है. मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि शहर के निजी और सरकारी अस्पतालों को मिलाकर 201 मरीज भर्ती हैं. वहीं, गुरुवार को 71 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया और 13 नए बीमारों को भर्ती किया गया. भर्ती मरीजों में से एक हालत गंभीर बताई जा रही है.मृतकों के नाम उर्मिला यादव (60 साल), नंदलाल पाल (75 साल), उमा कोरी (31 साल), मंजुला (74 साल), ताराबाई कोरी (70 साल), गोमती रावत (50 साल), सीमा प्रजापत (50 साल), संतोष बिगोलिया, जीवन वाव बरेडे (80 साल), अव्यान साहू (6 माह), अशोक लाल पंवार, सुमित्रा बाई, शंकर भाया (70 साल) और अरविंद लिखर हैं. मृतकों में ज्यादातर मरीज 50 साल या उससे ऊपर की उम्र के हैं।
जांच रिपोर्ट में जानलेवा बैक्टीरिया
दूषित पानी से प्रभावित भागीरथपुरा इलाके के घरों से पानी के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए भेजा गया था. इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट गुरुवार (1 जनवरी) को सार्वजनिक की गई. इस रिपोर्ट में दूषित पानी की बात को स्वीकारा गया है. महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब में हुई जांच में ई कोलाई और शिगेला जैसा जानलेवा बैक्टीरिया मिला है. ये बैक्टीरिया इंसानों के मल-मूत्र में पाए जाते हैं. इसके साथ ही हैजा फैलने की आशंका जताई जा रही है।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है. मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को नोटिस देकर दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. NHRC का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अफसरों ने दूषित पानी की सप्लाई रोकने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया।

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