कांग्रेस का केंद्र से सवाल: क्या कश्मीर पर विदेशी मध्यस्थता स्वीकार की गई?
नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर समझौते को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण और संवाद की मांग की है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक बुलाने और संसद का विशेष सत्र आयोजित करने की अपील की है, ताकि पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर पर विस्तृत चर्चा हो सके।
इसी के साथ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाते हुए कहा है, कि क्या भारत ने शिमला समझौते के बाद अपनी नीति बदली है? क्या कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष, विशेषकर अमेरिका की मध्यस्थता को स्वीकार कर लिया गया है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक बातचीत चैनल खोले गए हैं? उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा भारत-पाक के बीच ‘तटस्थ जगह’ पर वार्ता की बात करना कई चिंताजनक संकेत देता है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और पाकिस्तान चार दिन की तीव्र हवाई झड़पों के बाद तत्काल प्रभाव से सीजफायर पर राजी हुए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले सीजफायर की घोषणा करना और फिर भारत-पाक के बीच बातचीत की पुष्टि होना, सरकारी पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। इन हालात में कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हो, संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए, ऑपरेशन सिंदूर, सीजफायर समझौता, और अमेरिका की भूमिका पर खुली चर्चा हो और अंतत: कश्मीर पर भारत की पारंपरिक नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए।

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