दूल्हा बनेंगे बाबा विश्वनाथ, लगाई जाएगी अयोध्या की हल्दी!
महाशिवरात्रि के दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विवाह होता है. विवाह से पहले काशी में इससे जुड़ी दूसरी रस्में भी निभाई जाती हैं. इस बार 6 मार्च से ही विवाह के कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे .हल्दी की रस्म से इसकी शुरुआत होगी. वाराणसी के टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास पर शादी की रस्में निभाई जाएंगी. इस दौरान भक्तों की भीड़ भी वहां एकत्र होती है.
हल्दी की रस्म की शुरुआत के साथ ही मंगल गीत और मंगल ध्वनि के साथ शहनाई की धुन भी महंत आवास पर गूंजेगी. काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी ने बताया कि 350 साल से अधिक समय से महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के विवाह का उत्सव मनाया जाता है. इस बार इस उत्सव में पहली बार बाबा को लगाई जाने वाली हल्दी अयोध्या से मंगाई गई है. पंडित राघवेंद्र पांडेय ने इस महाराष्ट्र के खंडोवा की हल्दी को भेजा है .
मेरे लिए सौभाग्य की बात
राघवेंद्र पांडेय ने बताया कि यह उनके लिए सौभाग्य को बात है कि उनके हाथों से भेजी गई हल्दी से काशी के पुराधिपति बाबा विश्वनाथ को हल्दी लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि जीवन भर वह अब इस रस्म को निभाएंगे.
जानें शिव विवाह का पूरा शेड्यूल
गौरतलब है कि 6 मार्च को हल्दी के रस्म के बाद 7 मार्च को मंगल गीतो से महंत आवास गुंजयमान होगा और 8 मार्च यानी महाशिवरात्रि के दिन धूम धाम से बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती का विवाह होगा. महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद रंगभरी एकादशी पर माता गौरा का गौना होगा.

कचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
‘नेताओं के द्वारा बनाए गए धर्मगुरु सत्ता के गुरु’, शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का गौ माता पर बड़ा बयान
आज से बदल गया PMO का पता, अब सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन
Durg: सोशल मीडिया पर पिस्टल लहराते अपलोड किया वीडियो, पहुंच गए जेल, पुलिस ने लिया एक्शन
Kondagaon: कोकोड़ी मक्का प्रोसेसिंग प्लांट के विरोध में 12 घंटे से प्रदर्शन जारी, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
CG News: जॉर्ज कुरियन ने नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप, CM साय के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने भी कसा तंज
CG News: नक्सलियों से 1100 हथियार बरामद, 532 हुए ढेर, नक्सलवाद को लेकर विजय शर्मा ने गिनाए चौंकाने वाले आंकड़े
Chhattisgarh के आदिवासियों की अनोखी परंपरा, जहां ‘मठ बांधना’ और ‘कड़साल’ के साथ आत्मा को दी जाती है विदाई