गरियाबंद| गरियाबंद में आयोजित 'सुशासन तिहार' कार्यक्रम एक बार फिर विवादों और चर्चाओं में घिर गया है। हालिया घटनाक्रम में प्रदेश के मंत्री दयाल दास बघेल ने मंच से ही एक अनुविभागीय अधिकारी (SDO) को कड़ी फटकार लगा दी। दरअसल, पोखरा में आयोजित शिविर के दौरान मंच संचालन कर रहे SDO विकास चंद्राकर ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए सांसद रूप कुमारी चौधरी का नाम लिए बिना सीधे विधायक रोहित साहू का नाम पुकार लिया। इस चूक पर मंत्री ने नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद अधिकारी ने तत्काल अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी।

बाल श्रम का मामला गरमाया

इससे पहले इसी कार्यक्रम में संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया था। फिंगेश्वर के पोखरा ब्लॉक में आयोजित इस सरकारी उत्सव में मंत्री की मौजूदगी के बावजूद छोटे बच्चे मेहमानों को नाश्ता और शरबत परोसते देखे गए। बताया जा रहा है कि इन बच्चों को 150 से 200 रुपये की दिहाड़ी पर काम पर लगाया गया था। बच्चों के गले में 'सुशासन तिहार' का आधिकारिक बैच लटका होना इस बात का प्रमाण था कि यह सब प्रबंधन की जानकारी में हो रहा था। हालांकि, मीडिया की सक्रियता देख आनन-फानन में बच्चों को वहां से हटा दिया गया।

अधिकारियों के जवाबों में विरोधाभास

जब शिविर में मौजूद श्रम अधिकारी जयंती बंसल से बाल श्रम को लेकर सवाल किया गया, तो उनके बयानों में स्पष्टता की कमी दिखी। शुरुआत में उन्होंने इसे बड़ी गलती माना, लेकिन बाद में तर्क दिया कि यदि बच्चे कैटरिंग व्यवसायी के परिवार के हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। हालांकि, उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए उम्र और परिस्थितियों की जांच के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

क्या है सुशासन तिहार 2026?

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में 1 मई से "सुशासन तिहार 2026" अभियान का आगाज हुआ है, जो 10 जून तक चलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन को सीधे आम जनता की चौखट तक पहुँचाना है। इस दौरान कलेक्टर से लेकर ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी गांवों का दौरा कर रहे हैं ताकि लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया जा सके।

जहाँ एक ओर सरकार इसे जन-कल्याण का बड़ा माध्यम बता रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही और बाल श्रम जैसी घटनाओं ने अभियान की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।