नई दिल्ली: भारत में अगले एक दशक के भीतर जनसांख्यिकीय बदलाव की एक नई तस्वीर उभरने वाली है। वर्ष 2036 तक देश में बुजुर्गों की जनसंख्या 20 करोड़ के पार पहुंच जाएगी, जो 2011 के मुकाबले दोगुनी होगी। परिवारों के छोटे होने और औसत आयु बढ़ने के साथ ही अब भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए पेंशन नियामक (PFRDA) नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है।

'एनपीएस संचय': सरल और सुरक्षित निवेश का नया विकल्प

पेंशन को म्यूचुअल फंड के समान समझने के बजाय उसे एक मजबूत आर्थिक आधार बनाने के लिए 'एनपीएस संचय' योजना शुरू की जा रही है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन की गई है जो निवेश के जटिल विकल्पों (जैसे इक्विटी या बॉन्ड के चयन) में नहीं पड़ना चाहते। यह ढांचा 2004 से सरकारी कर्मचारियों के लिए चल रहे मॉडल पर आधारित होगा। पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, इस मॉडल ने लगभग 9.5% का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है, जो बैंक एफडी और अन्य सरकारी बचत योजनाओं की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक है।

यूपीआई के जरिए मात्र दो क्लिक में खुलेगा खाता

पेंशन प्रक्रिया को बैंक खाता खोलने या यूपीआई पेमेंट करने जितना आसान बनाया जा रहा है। अगले 30 दिनों के भीतर दो बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च होने की उम्मीद है। भीम (BHIM) इंटरफेस पर यूपीआई के माध्यम से निवेशक केवल दो क्लिक में अपना एनपीएस खाता खोल सकेंगे। यदि आपका पहले से किसी बैंक में खाता है, तो यूपीआई ऐप वहीं से आपकी केवाईसी (KYC) जानकारी प्राप्त कर लेगा, जिससे कागजी कार्रवाई की जरूरत खत्म हो जाएगी। 'स्टार एनपीएस' प्लेटफॉर्म के जरिए अब ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में भी एनपीएस की पहुंच आसान होगी।

पेंशन और स्वास्थ्य कवर का 'डबल धमाका'

बुढ़ापे की चिंताओं को दूर करने के लिए 'पेंशन-स्वास्थ्य खाता' एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है। इस योजना के तहत आपके पेंशन फंड का एक हिस्सा स्वास्थ्य जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जो टॉप-अप इंश्योरेंस की तरह काम करेगा। अस्पताल के खर्च का शुरुआती हिस्सा आपके स्वास्थ्य खाते से चुकाया जाएगा और बाकी का 5 लाख तक का कवर बीमा कंपनी देगी। ग्रुप पॉलिसी होने के कारण इसका प्रीमियम भी काफी कम होगा, जिससे आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

निकासी नियमों में लचीलापन और बढ़ती सुविधाएं

एनपीएस अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लचीला और निवेशक-हितैषी हो गया है। अब मैच्योरिटी पर जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा अपने पास रखने की सुविधा दी जा रही है। यदि आपका कुल फंड 5 लाख रुपये तक है, तो आप इसे कभी भी निकाल सकते हैं। इसके अलावा, अब 15 साल के लॉक-इन की बाध्यता भी खत्म हो गई है। निवेशक 75 साल की उम्र तक अपनी एन्युटी (नियमित पेंशन) को टाल सकते हैं, जिससे उनका पैसा बाजार के लाभ के साथ बढ़ता रहेगा। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों के करीब 50 करोड़ उन लोगों को जोड़ने का लक्ष्य है जो फिलहाल पेंशन के दायरे से बाहर हैं।