1 लड़की को देख तैयार हुईं 30 पहलवान
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक के छोटे से गांव उमरेठ के किसान परिवार की बेटी शिवानी इन दिनों एक बार फिर प्रदेश में चर्चा में है. विक्रम अवार्ड के लिए चयनित शिवानी नंदलाल पवार दंगल गर्ल के रूप में पहले ही पहचान बना चुकी हैं. शिवानी को देखकर क्षेत्र की बेटियों ने प्रेरणा ली और परासिया ब्लॉक की 30 से ज्यादा बेटियों ने नेशनल स्तर पर अपनी कुश्ती का प्रदर्शन किया. बेटियां पहलवानी के गुर सीख रही हैं.
शिवानी की दोस्त अब सिखा रही है कुश्ती के दांव-पेंच
शिवानी के साथ कुश्ती की प्रैक्टिस करने वाली हिन्द केशरी विनीता धुर्वे कोच बनकर अन्य लड़कियों को तैयार कर रही हैं. क्षेत्र में महिला कुश्ती की शुरूआत खेल युवा कल्याण विभाग की पायका योजना के तहत उमरेठ में हुई. उस दौरान धमनिया गांव के कलशराम मर्सकोले ने खेलकूद को बढ़ावा देने उमरेठ में प्रयास शुरू किया. साल 2010 और 2011 में ममता मरकाम और सरिता काकोडिया ने नेशनल कुश्ती में एमपी का प्रतिनिधित्व किया.सरिता ने हैदराबाद में हिंद केशरी खिताब भी जीता. उन दिनों शिवानी ने पायका स्टेट फुटबाल में भाग लिया. इन महिला पहलवानों से प्रभावित होकर शिवानी ने वर्ष 2012 में 11 साल की उम्र में पहले प्रयास में ही नेशनल कुश्ती तक सफर तय किया. मध्य प्रदेश खेल विभाग के कुश्ती अकादमी में प्रवेश मिलने पर शिवानी ने पीछे लौटकर नहीं देखा, लेकिन वो जब भी उमरेठ आती थी. यहां महिला पहलवानों से अपने अनुभव साझा करते हुए उनका मार्गदर्शन करती रही है.
शिवानी की सफलता ने दिया आत्मविश्वास
शुरूआती दौर में शिवानी के साथ दंगल में दमखम आजमाने वाली मोरडोंगरी खुर्द पंचायत की विनीता धुर्वे को साल 2015 में जबलपुर में हिंद केशरी खिताब मिला. अलीराजपुर के बाद फिलहाल में पीएमश्री आदर्श कन्या शाला परासिया में स्पोर्ट टीचर पदस्थ हैं. उनका कहना है कि शिवानी की सफलता कई लड़कियों में आत्मविश्वास का संचार कर रही है.
महिला कुश्ती को बढ़ावा देने की आवश्यकता
ढाला पंचायत की पहलवान मुस्कान राजकुमार परतेती ने साल 2025 में कुश्ती नेशनल में शामिल हुई है. वो कहती हैं कि "महिला कुश्ती को बढ़ावा देने अभी काफी प्रयास और आवश्यक सामग्री की आवश्यकता है. शिवानी की तरह अच्छी मेट पर अभ्यास करने का अवसर मिले."
जिले में और भी प्रतिभाएं हैं मौजूद
दीघावानी पंचायत निवासी रानी विनोद पतालिया ने साल 2024 में कॉलेज से स्टेट कुश्ती में भाग लिया. उनका कहना है कि शिवानी की सफलता हमारा उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन करता है. क्षेत्र की बेटियों को प्रशिक्षण मिले तो अनेक प्रतिभा निखरकर सामने आएगी.
परिवार का मिलने लगा सपोर्ट
सालोनी डेहरिया कहती है कि "अच्छे संसाधन और अवसर मिले तो परासिया उमरेठ की लड़कियां भी शिवानी की तरह देश के लिए मेडल जीत कर लाने उत्सुक और तैयार हैं. सबसे अच्छी बात की परिवार के लोग अब लड़कियों को कुश्ती सीखने से नहीं रोकते."
बेटियों को कुश्ती में भेजना चुनौती से कम नहीं था
शिवानी पवार के पिता नंदलाल पवार की तीन बेटियां हैं और तीनों ही कुश्ती खिलाड़ी हैं. नंदलाल पवार ने ईटीवी भारत को बताया कि "ग्रामीण इलाकों में बेटियों को स्कूल भेज दिया जाए, यही काफी था, खेल तो बहुत दूर की बात थी. फिर खेलों में भी कुश्ती जैसा जिसे पुरुषों का खेल माना जाता है. जब मेरी बेटियों ने कुश्ती शुरू की, तो हमने उनका साथ दिया, लेकिन समाज ने कई तरह के ताने दिए.हमने समाज की परवाह किए बिना ही अपनी बेटियों को कुश्ती के दंगल में उतारा और आज हमारी बेटी दुनिया में नाम रोशन कर रही हैं. जिले की दूसरी बेटियां भी जो खेलों में रुचि रखती हैं. उन्हें भी खुलकर खेलना चाहिए और परिवार वालों को साथ भी देना चाहिए."

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