महाकाल की शरण में रवि किशन, बोले- बाबा के बिना कुछ नहीं
उज्जैन: अवंतिका नगरी उज्जैन में आज सुबह आस्था का एक अनुपम संगम देखने को मिला, जब भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और गोरखपुर के सांसद रवि किशन देवाधिदेव महादेव के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। महाकाल की नगरी में उनकी इस उपस्थिति और भक्तिपूर्ण अंदाज ने श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
भस्म आरती के साक्षी बने रवि किशन
बुधवार तड़के जब पूरा शहर सो रहा था, रवि किशन बाबा महाकाल की सुप्रसिद्ध भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर प्रांगण पहुंचे। भस्म आरती के दिव्य दर्शन करने के पश्चात उन्होंने गर्भगृह के चांदी द्वार से बाबा महाकाल का अभिषेक किया।
भक्ति भाव: पूजा के दौरान रवि किशन पूरी तरह शिव की भक्ति में सराबोर दिखे। वे काफी देर तक हाथ जोड़कर जाप करते रहे और नंदी हॉल में बैठकर भगवान का ध्यान लगाया।
सादगी: मंदिर परिसर में मौजूद आम श्रद्धालुओं ने रवि किशन की सादगी की जमकर प्रशंसा की। एक जनसेवक और कलाकार होने के बावजूद, उनकी सरलता ने वहां मौजूद हर शख्स को प्रभावित किया।
लोक-कल्याण की कामना
लगभग 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए रवि किशन भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल के चरणों में आकर जो शांति मिलती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि उन्होंने भगवान से विशेष रूप सेअपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर की जनता की समृद्धि की प्रार्थना की। समस्त राष्ट्र और प्रदेश में खुशहाली व शांति के लिए आशीर्वाद मांगा।
सितारों की पहली पसंद बना महाकाल दरबार
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर न केवल आम भक्तों बल्कि विशिष्ट हस्तियों के लिए भी आध्यात्मिक शांति का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। रवि किशन से पहले भी मनोरंजन और राजनीति जगत की कई बड़ी हस्तियां यहाँ मत्था टेक चुकी हैं। भस्म आरती की बढ़ती लोकप्रियता और मंदिर की भव्यता ने इसे वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी है।
"महाकाल की शरण में आना साक्षात मोक्ष की अनुभूति जैसा है। मैं यहाँ केवल एक सांसद या कलाकार के रूप में नहीं, बल्कि बाबा के एक साधारण भक्त के रूप में आया हूँ।"

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