अक्षय तृतीया आज: खरीदारी का महामुहूर्त, जानें पूजा विधि और महत्व
नैनीताल: हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक 'अक्षय तृतीया' वर्ष 2026 में 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और शुभ कार्य कभी समाप्त नहीं होता। पौराणिक कथा के अनुसार, सदाचारी धर्मदास ने घोर कष्टों के बावजूद इस दिन दान-पुण्य का मार्ग नहीं छोड़ा, जिसके फलस्वरूप वह अगले जन्म में प्रतापी राजा बना। इस अवसर पर सत्तू, घड़ा, अनाज और वस्त्रों के दान का विशेष महत्व है।
खरीदारी का शुभ समय:
अक्षय तृतीया एक अबूझ मुहूर्त है। इस वर्ष कीमती धातुओं या भूमि की खरीदारी के लिए 19 अप्रैल सुबह 10:49 से 20 अप्रैल सुबह 5:51 तक का समय अत्यंत शुभ है। विशेषकर दोपहर 1:58 से 3:35 के बीच का समय सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि, शाम 5:12 से 6:49 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें नई खरीदारी से बचना चाहिए।
उत्तराखंड में महत्व:
इस महापर्व का उत्तराखंड से गहरा नाता है, क्योंकि इसी दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते हैं और चारधाम यात्रा का शुभारंभ होता है। इसी तिथि को भगवान परशुराम का जन्म और मां गंगा का धरती पर अवतरण भी हुआ था। हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान, बल्कि जीवन में नई और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है।

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