बासोड़ा पर करें 5 सटीक उपाय, होगा संतान का भग्योदय! बनी रहेगी मां शीतला की कृपा!
शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है. यह पर्व खासकर माताएं अपने बच्चों की भलाई और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं. शीतला अष्टमी होली के आठ दिन बाद, चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन माता शीतला की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. इस दिन विशेष पूजा और उपाय करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और अपार सफलता मिलती है.
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी
हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी 2025 में 21 मार्च, को मनाई जा रही है. ये सुबह 2 बजकर 45 मिनट से लेकर 4 बजकर 23 मिनट तक होगा. वहीं, शीतला अष्टमी 22 मार्च, को मनाई जा रही है. जो सुबह 4:23 से लेकर 23 मार्च, सुबह 5:23 बजे तक रहेगा.
शीतला अष्टमी के उपाय
शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है. यह पर्व खासकर माताएं अपने बच्चों की भलाई और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं. शीतला अष्टमी होली के आठ दिन बाद, चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन माता शीतला की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है. इस दिन विशेष पूजा और उपाय करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और अपार सफलता मिलती है. इस बार शीतला अष्टमी कब रखी जा रही इस दिन क्या उपाय करें आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी
हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी 2025 में 21 मार्च, को मनाई जा रही है. ये सुबह 2 बजकर 45 मिनट से लेकर 4 बजकर 23 मिनट तक होगा. वहीं, शीतला अष्टमी 22 मार्च, को मनाई जा रही है. जो सुबह 4:23 से लेकर 23 मार्च, सुबह 5:23 बजे तक रहेगा.
शीतला अष्टमी के उपाय
2. लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करें
माता शीतला को इस दिन लाल रंग की वस्तुएं अर्पित करें. आप उन्हें लाल रंग के फूल, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री आदि अर्पित कर सकते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है. लाल रंग को शुभ और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यह विशेष रूप से शीतला अष्टमी के दिन किया जाता है.
3. बासी भोग का महत्व
शीतला अष्टमी के दिन बासी भोजन को माता शीतला को अर्पित करना एक महत्वपूर्ण उपाय है. इस भोजन को अर्पित करने के बाद, उसी भोजन को गाय को भी खिलाना चाहिए. गाय को भोजन कराना और गौ सेवा करना संतान के लिए बहुत लाभकारी होता है. अगर संभव हो तो गौशाला में संतान के नाम से दान भी करें. इस उपाय से संतान के सभी दुख समाप्त होते हैं और उनका जीवन सुखमय बनता है.
4. मंत्र जाप करें
माता शीतला की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए शीतला अष्टमी के दिन मंत्र जाप करें. यह मंत्र है:
“शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता. शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः.”
इस मंत्र का जाप करने से संतान का भविष्य उज्जवल होता है और उसके जीवन की सभी कठिनाइयां दूर होती हैं. साथ ही संतान को अच्छे स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है.
5. व्रत का पालन
अगर आप शीतला अष्टमी का व्रत करते हैं, तो इसे पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करें. इस दिन खास ध्यान रखें कि घर का वातावरण स्वच्छ और पवित्र रहे, ताकि देवी शीतला की कृपा बनी रहे. व्रत करने से संतान के जीवन में आने वाली समस्याएं खत्म होती हैं और जीवन में खुशियां आती हैं.

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