सोनू निगम के बाद इला और अभिजीत ने साधा म्यूजिक माफिया पर निशाना, कविता कृष्णमूर्ति और उदित ने कही ये बात !

गायक सोनू निगम की तरफ से शुरू की गई पक्षपात वाली बहस में अब अभिजीत भट्टाचार्य, कविता कृष्णमूर्ति और इला अरुण जैसे कुछ और लोकप्रिय गायक भी उतर आए हैं। इस बहस में अपनी बात रखते हुए अभिजीत भट्टाचार्य ने कहा है कि पक्षपात जैसी चीजें अब बहुत ज्यादा होने लगी हैं। उन्होंने बताया कि उनके समय में संगीतकार और फिल्म निर्देशक तय करते थे कि किस गीत को कौन सा गायक गाएगा। इसमें निर्माता कोई हस्तक्षेप नहीं करते थे।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस समय बहस चल रही है कि कुछ फिल्म निर्माता पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कंट्रोल कर रहे हैं। इस बहस में अभिजीत ने कहा, ‘यह बहुत ज्यादा हो रहा है। 90 के दशक में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उस समय तो यह सोचा भी नहीं जा सकता था। एक गायक से कोई गाना दूसरे गायक को दिया जाता था लेकिन उसकी एक प्रमाणिक वजह होती थी। तब चीजें इतनी गंदी नहीं हुआ करते थीं।’

अभिजीत आगे कहते हैं, ‘किसी भी फिल्म के निर्देशक और संगीतकार ही यह तय करते थे कि इस गीत को कौन गायक गाएगा, न कि कोई निर्माता कंपनी या कोई कलाकार। यह फैसला करने वाले सलमान खान कौन होते हैं कि किस गीत को कौन गायक गाएगा और कौन नहीं? किसी भी गायक से गीत छीनकर खुद गा लेने वाले सलमान खान होते कौन हैं? यहां तो सीधे-सीधे पक्षपात दिखाई देता है।’

 

भारतीय संगीत की दुनिया की लोकप्रिय गायिका कविता कृष्णमूर्ति कभी किसी म्यूजिक लेवल के साथ जुड़ी नहीं रही हैं। उन्होंने वही गाने गाए हैं जिसके लिए उन्हें कहीं से आमंत्रण मिला हो। उनके लिए यह नया बदलाव कैसा है? यह बताते हुए वह कहती हैं, ‘वंशवाद मेरे समय में कभी नहीं था। वहां गुटबाजी हुआ करती थी लेकिन उससे कभी किसी को नुकसान नहीं हुआ। एक निर्माता कभी भी संगीतकार के आड़े नहीं आता था।’

अपनी बात को जारी रखते हुए कविता कहती हैं, ‘किसी में भी इतना साहस नहीं था कि वह आरडी बर्मन, खय्याम साहब, ओपी नैयर या रविंद्र जैन से यह कह सके कि आप इस गायक को ले लीजिए। यह सब खुद अपने फैसले लिया करते थे। अगर एक गाना किसी गायक पर फिट नहीं बैठ रहा है तो वह दूसरा संगीत बनाया करते थे। पहले संगीतकारों का कहना था कि गायक की आवाज सूट करनी चाहिए। इसलिए संगीतकार अलग-अलग आवाजों जैसे, अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और मेरे लिए संगीत बनाया करते थे।’

‘चोली के पीछे क्या है’ जैसे गीत को अपनी आवाज देने वालीं गायक इला अरुण का कहना है कि आज के समय में कोई भी अच्छा संगीतकार सफल नहीं हो सकता। वह कहती हैं, ‘वह चाहे कितनी भी मेहनत कर ले लेकिन गुटबाजी और वंशवाद उसे पनपने नहीं देंगे। माफिया इस इंडस्ट्री को चला रहा है। यह किसी के भविष्य को मार देने जैसा है। आज के समय में भी बहुत अच्छे और हुनरमंद गायक हैं लेकिन पिछले समय में चीजें ज्यादा साफ हुआ करती थीं। आजकल सिर्फ पांच-छह संगीतकार हैं जो पूरी इंडस्ट्री में घूम रहे हैं।’

इस बहस पर अपना बयान देते हुए उदित नारायण का कहना है, ‘लोग सोचेंगे कि मुझे आज कल काम नहीं मिल रहा है इसलिए मैं बोल रहा हूं। लेकिन, मैं बता देना चाहता हूं कि पिछले कुछ वर्षों में चीजें बहुत बदल गई हैं। 90 के दशक का वक्त सुनहरा युग कहा जाता है। संगीत और उनके बोल अब ऐसे नहीं होते। आज की पीढ़ी भी बहुत योग्य है लेकिन दिक्कत यह है कि लोग रातों-रात स्टार बनना चाहते हैं इसलिए, वह कुछ अलग रास्ते अपनाते हैं। आजकल ज्यादा रीमिक्स बनने का यही बड़ा कारण है।’

बता दें कि कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण दुबई में फंसे गायक सोनू निगम ने वहीं से एक वीडियो पोस्ट करके संगीत की दुनिया में खलबली मचा दी है। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह अब म्यूजिक, माफिया की शक्ल ले चुके हैं। इसी के बाद हिंदी संगीत की दुनिया के कई जाने-माने गायक और संगीतकार इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं।

Source:- Amar Ujala 

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