17 साल, हाइट 3 फीट, हिम्मत नहीं हारा, पहुंच गया सुप्रीम कोर्ट; ले आया डॉक्टर बनने का ग्रीन सिग्नल !

दुनिया में शायद ही ऐसा उदाहरण मिलेगा, जिसमें 3 फीट ऊंचाई और 14 KG वजन वाले 17 वर्षीय गणेश को लोग अब एक डॉक्टर के रूप में देखेंगे। गणेश का यह सपना सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पूरा हुआ। इससे पहले जब गणेश MBBS में एडमिशन के लिए पहुंचा था, तब कमिटी ने उनके कद को देखते हुए सवाल किया था- तुम्हारी हाइट इतनी कम है, तुम क्या ऑपरेशन कर पाओगे। फिर एडमिशन देने से मना कर दिया था।

NEET में 233 स्कोर

भावनगर जिले का गणेश बारैया जन्म से ही कुदरत की एक खामी का शिकार बना। गरीब परिवार में पला-बढ़ा गणेश 6 बहनों का एकमात्र भाई है। बचपन से उसका सपना था कि बड़े होकर डॉक्टर ही बनना है। उसने NEET में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 233 स्कोर किया। लेकिन एडमिशन कमेटी ने उसे मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ही नहीं दिया। कमिटी ने तर्क दिया, तुम्हारी हाइट और वजह बहुत ही कम है। यही नहीं, उसे 72% विकलांग तक माना। साथ ही कहा- तुम इमरजेंसी केस में ऑपरेशन नहीं कर पाओगे। इसलिए आप इसके लिए अयोग्य हैं।

हार नहीं मानी और हाईकोर्ट पहुंचा

गणेश के मां-बाप खेतों में मजदूरी करते हैं। इसलिए आर्थिक रूप से भी कमजोर हैं। ऐसे में गणेश के सपने के पूरा करने में नीलकंठ विद्यापीठ तडाजा के संचालकों दलपत भाई कातरिया और रैवतसिंह सरवैया ने साथ दिया। – गणेश को न्याय दिलाने उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। लेकिन यहां भी दुर्भाग्य ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ फैसला सुनाया। इस पर गणेश बुरी तरह से टूट गया।

फिर सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

हाईकोर्ट पहुंचने पर पता चला कि गणेश की ही तरह पहले भी दो बच्चे आ चुके हैं, जो केस हार चुके थे। इस लड़ाई में अब तीनों साथ हो गए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इस बार फैसला उनके हक में था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा, किसी भी स्टूडेंट की ऊंचाई और वजन कम हो, तो भी उसे अपना कैरियर बनाने से कोई रोक नहीं सकता।

Source: Dainik Bhaskar

 

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