ऐसा मंदिर जहाँ सिर्फ 7 दिनों में होता है लकवा रोग का इलाज

पक्षाघात का इलाज करने के लिए रोगी व उसके परिजन क्या कुछ नहीं करते, वह डॉक्टर को दिखाते है,क्योकि एक बार ये बीमारी किसी को लग जाये तो जीना मुश्किल हो जाता है . सारी जांचे करवाते हैं, paralysis ayurvedic treatment करवाते हैं, घरेलु नुस्खे व उपाय आजमाते हैं आदि लकवे से पीड़ित व्यक्ति के परिजन वह हर संभव प्रयास करने को राजी रहते जिससे उनका पक्षाघात ठीक हो जाए तो आज हम आपको इसका उपाय बताते है .

तो अब आपको अपने बेटे, बेटी, पिता, माँ आदि जिसे भी पक्षाघात (पैरालिसिस) हुआ हो उसके इलाज के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हैं, क्योंकि आज हम यहां आपको पक्षाघात यानी लकवा के मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. इन मंदिरो में आकर स्नान, परिक्रमा, भभूति आदि के प्रयोग मात्र से ही लकवे के भयंकर से भयंकर मरीज भी ठीक हो जाते हैं, वह भी सिर्फ 7 दिनों में इसमें कई रोगी पूरी तरह ठीक होने में 5 सप्ताह लग जाता हैं, लेकिन पहले सप्ताह में ही 40% आराम हो जाता हैं.यहाँ पर इलाज़ करवाने वाले मरीज भी यहाँ के चमत्कार को देख कर हैरान और परेशां है .

यह तो धन्य हो हमारी संस्कृति, हमारे ऋषि-मुनियों के वजह से ही यह सम्भव हैं की किसी बीमारी का इलाज मात्र भभूति, स्नान या मंदिर की परिक्रमा से ही हो जाता हैं. नहीं तो दुनिया में ऐसे कई बड़े बड़े डॉक्टर हैं, लेकिन वह इस रोग के आगे घुटने टेक देते हैं.बड़े बड़े विज्ञानिक भी यहाँ के चमत्कार को देख कर हैरान है और वो भी आज तक इसके पीछे की कहानी को नहीं जान पाए.

हमारे हिंदुस्तान में कई जगह पर ऐसे-ऐसे मंदिर हैं जो की अभी भी अति जिवंत हैं, वहां जाने मात्र से कई बड़े बड़े रोग नष्ट हो जाते हैं, जैसे लकवा, टाइफाइड, पागलपन, भूतप्रेत आदि. तो दोस्तों बिना अन्य चर्चा किये अब हम आगे बात करते हैं लकवा का मंदिर के बारे में, भारत में कहाँ कहाँ पर स्थित हैं यह मंदिर आदि, व इन मंदिर में जाकर पक्षाघात पैरालिसिस का इलाज कैसे करे लकवे को ठीक कैसे करे चलिए अब इस विषय में बात करते हैं.

राजस्थान एक ऐसी रहस्यमय जगह हैं जहां पर कई तरह के किस्से कहानियां सुनने को मिलती हैं. ठीक इसी राजस्थान में नागौर जिले के कुचेरा ग्राम के पास में एक गांव हैं जहां पर बुटाटी धाम मंदिर स्थित हैं. करीबन 600 साल पहले यहां पर एक संत हुए थे जिनका नाम चतुरदास जी था. यह एक सिद्ध योगी थे, इन्होने अपनी तपस्या से ऐसी कई सिद्धियां प्राप्त कर रखी थी जिससे यह कैसे भी रोगी को रोगमुक्त कर देते हैं.

यही सिनसिला इनके परलोक गमन के बाद से चलता आ रहा हैं. आज भी कोई लकवा का रोगी संत चतुरदास जी की समाधी के चक्कर लगाता हैं तो उसका पक्षाघात ठीक हो जाता हैं. यहां पर प्रत्येक वर्ष वैसाख, भादवा और माघ में महीने भर के लिए मेला लगता हैं. इस समाधी के मात्र 7 फेरे लगाने मात्र से रोग छूमंतर हो जाता हैं.यहाँ पर आने पर जो रोगी अपना जीवन बहुत परेशानी से गुजार रहे थे पूरी तरह ठीक हो गए है यही है बुटाटी धाम जो की राजस्थान में है .

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